निज वास्तविक रूप में प्रकट हो, चाहे परिस्थितियां कितनी विकट हो, निज वास्तविक रूप में प्रकट हो, चाहे परिस्थितियां कितनी विकट हो,
शब्द हैं तो गजल गीत रस छंद हैं शब्द से ही अलंकार सम्भव हुये शब्द हैं तो गजल गीत रस छंद हैं शब्द से ही अलंकार सम्भव हुये
मत जलो अब तुम होलिका बलिदान तुम्हारा व्यर्थ है सत्य है रौंदा हुआ और असत्य सर्वत्र है मत जलो अब तुम होलिका बलिदान तुम्हारा व्यर्थ है सत्य है रौंदा हुआ और असत...
प्रत्येक युग का सत्य ये कह गए ज्ञानी प्रज्ञ होलिका की अग्नि समझ जीवन का यज्ञ। प्रत्येक युग का सत्य ये कह गए ज्ञानी प्रज्ञ होलिका की अग्नि समझ जीवन का यज्ञ।
खुशियों के हजारों रंग, हमारे गालों पर मलकर जाती। खुशियों के हजारों रंग, हमारे गालों पर मलकर जाती।
खेल होली सब घुल - मिल जाते, पूरे जोश से होली का त्योहार मनाते। खेल होली सब घुल - मिल जाते, पूरे जोश से होली का त्योहार मनाते।